भ्रष्टाचार मुक्त शासन का दावा भी कोयले का काला खेल नहीं रोक सका


ना काहू से दोस्ती न काहू से वैर

सिंगरौली जिले में N.C.L.की कई कोयला खदाने संचालित है।इन्ही कोयला खदानों के कोयले की चोरी में कोल माफियाओ का एक बड़ा रैकेट दशको से अपना वारे न्यारे करने में जुटा हुआ है। दिन दुगनी रात चौगुनी की तर्ज पर अवैध कारोबार को बढ़ाने वालों के चमक दमक को देखकर देश के भविष गढ़ने वाले युवा जो जिले में बेरोजगारी की मार झेल रहें हैं,उनमें भी ऐसे अवैध कारोबार के तरफ़ रुझान बढ़ता दिखाई पड़ता है जो न केवल चिंतनीय है बल्कि भयावह भी है।  

सिंगरौली जिले का कोल माइंस से सटा क्षेत्र(C.K.D.)कोयला,कबाड़,डीजल,के काले कारोबार के चलते हमेशा सुर्खियों में रहता है।कुछ वर्ष पहले कोयले के काले कारोबारियों के अड्डे पर बड़ी कार्यवाही हुई थी। इसके बाद इस कर्यवाही की हनक लगभग एक वर्ष के करीब रही ,इस दौरान कोयले का काला कारोबार लगभग बन्द रहा और कोल माफिया भूमिगत हो गये थे।लेकिन सूत्रों कि माने तो अब कुछ महीनों से रात में ही नहीं दिन में भी यह कोयले का काला खेल फिर शुरू हो चूका है। हालांकि कुछ कार्यवाही भी हुई है लेकिन हाथी के दांत दिखाने के कुछ और खाने के कुछ और कि तर्ज पर हुआ है,क्योंकि काम तो बदस्तूर जारी है।  

काली रात में होता है काला खेल 

रेलवे ट्रेक और जंगलो के समीप आम आदमी के आँखों से दूर यह काला कारोबार, रात का अंधेरा  होते ही शुरू होता हैं और अंधेरा छटने व सूरज की लालिमा आसमान में झलके उसके पहले ही इस काले कारोबार के सबूत मिटा दिए जाते हैं।एनसीएल के सीएचपी के शैलो से जैसे ही रैक लोड कर थर्मल प्लांटों की ओर धीरे धीरे आगे बढ़ता है।वैसे ही पहले से घात लगाए सैकड़ो की संख्या में टिड्डी दल रैक पर चढ़ जाता है और देखते देखते ही कई ट्रक कोयला नीचे यह टिड्डी दल गिरा देते हैं और यही कोयला ट्रेक्टरों से एक जगह जमा कर दिया जाता है। फिर ट्रकों पर लोड कर वाराणसी के कोयला मंडी में भेज दिया जाता है।

कोयला की कमाई के लिए सफ़ेद पोश भी हांथ कर रहें हैं काला 

इस खेल में सभी सम्बन्धित विभागों की सेटिंग होती है।जिनका महीना समय से कोल माफिया द्वारा पहुचा दिया जाता है।इस काले कारोबार को सफेद पोशों,पत्तलकारों सहित सभी जिम्मेदार विभागों का संरक्ष्ण होता हैं।तभी तो कोल माफिया बन अकूत सम्पत्ति का मालिक बने इन लोगों के चौखट पर,खादी,पत्तलकार,और जिम्मेदार विभाग के गैर जिम्मेदार चौबीसों घण्टे दुम हिलाते देखे जा सकते हैं। 

सिक्कों की खनक धो देता है काले कारोबार का कलंक 

काले कारोबारियों की हनक इतनी है कि क्या मजाल कोईं इनके खिलाफ जुबान खोल सके। यदि किसी ने हिमाकत कि तो उनके गुर्गे उस आदमी के पीछे लग जाते हैं और दहशत  पैदा करने लगते हैं।इससे काम नही चला तो जिम्मेदार विभाग के गैर जिम्मेदारों के प्रीमियम मंत्र से सब तार-तार कर दिया जाता है।

भ्रष्टाचार मुक्त शासन का दावा भी कोयले का काला खेल नहीं रोक सका 

सिंगरौली में सूबे का निजाम बदलने के बाद भूमिगत हुए कोल माफियाओ की धमाचौकड़ी फिर दिखने लगी है। इनके बन्द पड़े अड्डे अब फिर धीरे-धीरे गुलजार होने लगे  है। 

आम जनता को यह बात समझ में  नही आ रहा है कि सत्ता पक्ष के नेता कोयले के कारोबार से अनजान हैं या जानबूझकर"आँख मूदे,कान में तेल डालें"हुए हैं? सच्चाई जो भी हो लेकिन दबी जुबान ही सही आम आदमी का तो कहना है कि कोल माफिया सभी को ऊपर से नीचे तक मैनेज कर के ही इस काले कारोबार को काली रात के अंधेरे में बेधड़क,बेख़ौफ़ और निडर हो केअंजाम देता है। ऐसे में भ्रष्टाचार मुक्त शासन का दावा महज़ दिव्यस्वपन ही लगता है। 

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