सिंगरौली : कोख के कातिलों पर कार्यवाही कब ?


माफ़ करना बेटियों हम अब तुम्हें गर्भ में भी नहीं बचा पा रहें हैं ....।  क़ानूनी तौर पर अभी लिंग परीक्षण, एक प्रतिबंधित कर्म है। आइये, जानें कि भ्रूण हत्या और इस पर रोक के प्रयासों की हक़ीकत सिंगरौली जिले में क्या है? 
ना काहू से दोस्ती न काहू से वैर

गर्भवती महिला के पेट में ताक-झांक कर लिंग परीक्षण का खेल,खेल कर काली कमाई करने वालों की जड़ें सिंगरौली जिले के बैढ़न में स्वास्थ्य विभाग के लचर रवैये से मजबूत होती जा रही है। सूत्रो की माने तो रैकेट से जुडे़ चिकित्सक लिंग परीक्षण के लिए आने वाले दम्पती से उसकी पूरी कहानी सुनते हैं। और अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए अल्ट्रासाउंड केंद्र भेज देते हैं, फिर परिस्थितियों का आकलन करने के बाद अगर ऐसा लगाता है कि दंपति बेटी नहीं चाहता तो फिर भ्रूण हत्या के नाम पर मोटी रकम वसूलने के लिए गर्भ में पल रहे शिशु के माथे पर बेटी का चस्पा लगा दिया जाता है। दम्पती को इस कदर प्रेरित किया जाता है कि वह तत्काल भ्रूण हत्या कराने के लिए तैयार हो जाए। इस पूरे खेल में चिकित्सक न तो किसी तरह का रजिस्टर मेंटेन करता है और न ही दम्पती को लिंग परीक्षण से संबंधित कोई रिपोर्ट दी जाती है। यानी अगर जांच के बाद डॉक्टर साहब ने मौखिक रूप से बता दिया कि गर्भ में बेटी या बेटा पल रहा है तो फिर दंपती के पास चिकित्सक की बात पर विश्वास करने के अलावा कोई दूसरा चारा नहीं रहता है। अगर जांच में भ्रूण बेटे का बताया गया और प्रसव के दौरान बेटी पैदा हुई तो आप संबंधित चिकित्सक के खिलाफ न तो कोई केस कर सकते हैं और न ही दावा कर सकते हैं कि चिकित्सक ने आप को गलत जानकारी दी। 

भ्रूण हत्या का ठेका हजारों में होता है 

शहर में भ्रूण हत्या का ठेका 15 हजार से लेकर 20 हजार रुपये तक में लिया जाता है। गर्भधारण करने की अवधि जितनी अधिक होती है,उसके अनुसार गर्भपात करने वाले चिकित्सक की दर बढ़ती जाती है। लिंग परीक्षण करने से लेकर गर्भपात करने वाले चिकित्सकों तक गर्भवती महिला को पहुंचाने में एक संगठित गिरोह की तरह काम करता है। हर स्तर पर महिला की जांच पड़ताल होती है। अगर कहीं भी चिकित्सक को फंसने की आशंका दिखी तो फिर पूरा खेल वहीं रोक दिया जाता है। 

क्या है कानून में प्रावधान 

प्री नेटल डायग्नोस्टिक टेक्निक्स एक्ट 1994 के तहत नियम तोड़ने वाले व्यक्ति अथवा सेंटर संचालकों के खिलाफ सीधी कार्रवाई का प्रावधान है। इसके तहत दोषी सेंटर संचालक को पांच हजार से एक लाख रुपये तक जुर्माना और छह माह से एक साल तक की कैद का प्रावधान है। दोषी चिकित्सक के मेडिकल प्रैक्टिशनर का निबंधन रद्द किया जा सकता है। इसके साथ ही लिंग परीक्षण के लिए आने वाली महिला और परिवार के लोगों के खिलाफ की कार्रवाई हो सकती है। जांच में इस्तेमाल होने वाली अल्ट्रासाउंड मशीन को भी सिविल सर्जन सील कर सकता है।

सूत्रों पर यकीन न भी किया जाय तो भी जिले में चल रहे उल्ट्रासोनोग्राफी सेंटरों पर सैंकड़ों की तादाद में होने वाले सोनोग्राफी और कुछ महीने पहले सरकारी अस्पताल के बाथरूम में मिले भ्रूण इस बात की ओर इशारा करता ही है के दाल में कुछ काला तो है।

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