निर्भया के दोषियों को फांसी देने वाले जल्लाद का फेरी से है ख़ास कनेक्शन।

                     
 उर्जान्चल टाइगर कार्यालय। 7805875468

7 साल 37 दिन के बाद निर्भया को इंसाफ मिलेगा।दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने मंगलवार को निर्भया गैंगरेप और हत्या मामले के दोषियों को फांसी की तारीख मुकर्रर कर दी गई। 22 जनवरी को सुबह 7 बजे फांसी मुकर्रर कर दी गई है।निर्भया के चारो गुनहगारों को 22 जनवरी 2020 को सुबह सात बजे फांसी दी जाएगी। ऐसे में एक सवाल जरूर आपलोगों के ज़ेहन में कौंध रहा होगा की,आखिर इन दोषियों को फांसी के फंदे पर लटकाने वाला कौन है?

कपड़े की फेरी करने वाले पवन, लटकाएंगे निर्भया के दोषियों को 

पटियाला हाउस कोर्ट द्वारा चारों गुनाहगारों मुकेश, पवन, अक्षय और विनय को फांसी पर लटकाने की जिम्मेदारी मेरठ के जल्लाद पवन को मिली है। पवन कुमार का कहना है कि यह उनका खानदानी काम है। इस बारे में जब पता किया गया तो कुछ चौंकाने वाली जानकारी मिली। पवन कुमार के दादा, जिनका नाम जल्लाद कल्लू था, उन्होंने इंदिरा गांधी के हत्यारों को फांसी पर लटकाया था। उत्तर प्रदेश के मेरठ के रहने वाले पवन कुमार का खानदान इस काम में पिछले चार दशकों से जुड़ा हुआ है। पवन के पिता मामू भी कई कैदियों को फांसी पर लटका चुके हैं। पवन के खानदान द्वारा अभी तक 60 से अधिक कैदियों को फांसी पर लटकाया जा चुका है। इनमें पूर्व पीएम इंदिरा गांधी के हत्यारे सतवंत सिंह और केहर सिंह भी शामिल हैं। इनके अलावा रंगा और बिल्ला को भी मामू ने ही फंदे पर लटकाया था।

पवन कुमार

पवन कुमार ने अभी तक किसी भी कैदी को फांसी पर नहीं लटकाया है। मतलब यह उनकी पहली फांसी होगी। 56 वर्षीय पवन कुमार मेरठ के कांशीराम आवासीय कॉलोनी में रहते हैं। इनका असली नाम सिंधी राम है। जिस घर में पवन कुमार रहते हैं, उसमें चारों तरफ भगवान की तस्वीरें लगी हुई हैं। पवन की फैमली में पांच बेटियाँ और दो बेटों सहित कुल 9 मेंबर्स हैं। पहले इनकी तनख्वाह 3,000 रुपये प्रतिमाह थी, जिसके बाद पवन ने सरकार से अपनी पेमेंट 20,000 रुपये करने की अपील की थी। लेकिन, सरकार ने सिर्फ दो हजार रुपये ही बढ़ाए। अब उन्हें पांच हजार रुपये प्रति महीने मिलते हैं। पिछली चार पीढ़ियाँ इसी काम को करने वाले पवन अपनी अजीविका चलाने के लिए कपड़ों का गट्ठर साइकिल के पीछे रखकर गली गली घूम कर कपड़ा बेचते हैं।जब वो कपड़ों का गट्ठर साइकिल के पीछे रखकर आवाज लगाते हुए मेरठ के मोहल्लों में निकलता है, तो औरतें उसे बुलाती हैं,मोलभाव करती हैं,वो चाव से उन्हें कपड़े दिखाता है,तब उससे कपड़े खरीदने वाली भीड़ को अंदाज भी नहीं होता कि वो जिससे कपड़ा खरीद रही हैं, वो देश के चंद जल्लादों में एक है। जिनकी चार पीढियां इसी काम से जुड़ी हैं 

सात साल पुराना है "निर्भया कांड"

करीब सात साल पहले 16 दिसंबर, 2012 की रात दिल्ली में निर्भया से गैंगरेप हुआ था। दोषियों ने उनके साथ दरिंदों जैसा व्यवहार किया था। चलती बस में उनके साथ बर्बरता हुई थी। इसके चलते वह बहुत ज्यादा घायल हो गई थीं। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कुछ दिन इलाज के बाद निर्भया की मौत हो गई थी। इसके खिलाफ देशभर में जबर्दस्त गुस्सा देखा गया था। सरकार ने इस घटना के बाद दुषकर्म से जुड़े कानून को सख्त बनाया था। 


घटना को अंजाम देने वाले 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। लेकिन, उन 6 आरोपियों में से एक नाबालिग था जिसे जुवेनाइल जस्टिस कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया गया था। वहीं, एक अन्य आरोपी राम सिंह ने तिहाड़ जेल में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी। बाकी चार आरोपियों को पटियाला हाऊस कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है।
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