बलरामपुर : 77 साल पुराने रीति-रिवाजों से मनाया जाता है होली - चिंतामणि महाराज

सर्वाधिकार सुरक्षित @ उर्जांचल टाईगर Holi is celebrated by 77 years old customs 77 साल पुराने रीति-रिवाजों से मनाया जाता है होली।


बलरामपुर से कन्हैया सोनी/सैफ आली 

बलरामपुर।। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के त्रिकोट में 77 साल पुराने रीति-रिवाजों से होली मनाया जाता है। जहां गुरु को भगवान के रूप में श्रद्धालु  पूजा करते हैं। गुरु के चरण स्पर्श के बाद लोग होली खेलते हैं। आज भी पूरे धूमधाम से  माता पूर्णिमा एवं संत गहिरा गुरु जी पुत्र चिंतामणि महाराज जो सामरी विधानसभा क्षेत्र के विधायक के साथ उत्साह श्रद्धालु होली खेलते हैं।  

श्रद्धालुओं का कहना है किमाता पूर्णिमा एवं संत गहिरा गुरु हामरे लिए भगवान से कम नहीं है।  खास बात यह है कि हर साल होली में ग्रामीण सबसे पहले अपने के साथ माता पूर्णिमा एवं संत गहिरा गुरु जी के चरण स्पर्श के बाद पुजा अर्चना के साथ उनके साथ होली खेलते हैं। वे कहते हैं, आज भी लगता है माता पूर्णिमा मेरे साथ हैं,हर परिस्थिति में उनके उपस्थित होने का एहसास होता है।   


सामरी विधायक बताते हैं की,यह परंपरा 1952 में जब संत गिरा गुरुजी बलरामपुर जिले के त्रिकोट में आये तब से यह परंपरा चल रहा है। माता पूर्णिमा एवं संत गहिरा गुरु जी चरण स्पर्श करने का मौका साल में दो बार ही देते हैं, एक कृष्ण जन्माष्टमी है और दूसरा होली का त्यौहार। 


झारखंड और छत्तीसगढ़ बलरामपुर जिला सरगुजा में आए  महिला और पुरुष पूजा करते है उसके बाद अबीर से महिलाएं पुरुष व उपस्थित जनसमूह एक दूसरे का अबीर लगाते हैं। इस होली में जनसमूह के बीच में ढोलक बजाते विधायक चिंतामणि महाराज जी नजर आए और आम जन के साथ होली का उत्सव मनाया।


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