शपथ लेने के बाद शिवराज बोले,पहली प्राथमिकता #COVIDー19 से मुक़ाबला,बाक़ी सब बाद में...

शपथ लेने के बाद शिवराज बोले,पहली प्राथमिकता #COVIDー19 से मुक़ाबला,बाक़ी सब बाद में...


शिवराज सिंह चौहान ने बतौर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज चौथी बार मध्य प्रदेश मुख्यमंत्री शपथ ली।रात नौ बजे एक सादे सामारोह में राज्यपाल लालजी टंडन ने शिवराज सिंह चौहान को राज्य के मुख्यमंत्री की शपथ दिलवाई। देशभर में कोरोनावायरस की महामारी को देखते हुए शिवराज का शपथ ग्रहण समारोह सिर्फ 6 मिनट तक चला। शपथ ग्रहण के बाद सीएम शिवराज ने ट्वीट कर कहा, ‘सबसे पहली प्राथमिकता कोविड-19 से मुक़ाबला है.बाक़ी सब बाद में…’

शपथ ग्रहण से ठीक पहले भाजपा विधायक दल की बैठक हुई। जिसमें शिवराज सिंह चौहान को विधायक दल का नेता चुना गया। इसके बाद शिवराज सिंह ने कहा कि ये उनके लिए एक भावुक पल है। उन्होंने कहा,
“आज मुझे बीजेपी एमपी के विधायक दल का नेता चुना गया है। यह मेरे लिए एक बहुत ही भावुक क्षण है। मैं बीजेपी का एक सामान्य कार्यकर्ता हूं।यही एक ऐसी पार्टी है, जो सामान्य कार्यकर्ता को भी बड़े कार्य करने का अवसर प्रदान करती है।”
शिवराज सिंह चौहान


चौथी बार मुख्यमंत्री बने शिवराज

मध्यप्रदेश के इतिहास में यह पहला मौका है जब कोई व्यक्ति कोई चौथी बार राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ लिया है। शिवराज के पहले अर्जुनसिंह और श्यामाचरण शुक्ल तीन- तीन बार सीएम रह चुके हैं। 

भाजपा नेता शिवराज सिंह चौहान चौथी बार मध्यप्रदेश राज्य की कमान संभाली। पहली बार 29 नवंबर 2005 को मध्यप्रदेश को राज्य के सीएम बने थे। इसके बाद वे 12 दिसंबर 2008 में सीएम बने थे।  वहीं तीसरी बार शिवराज ने 8 दिसंबर 2013 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। 

मामा के नाम से लोकप्रिय हैं शिवराज

शिवराज सिंह की लो​कप्रियता का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि उन्हें राज्य की जनता मामा कहकर बुलाती है। वर्ष 2018 का विधानसभा चुनाव भी शिवराज के नेतृत्व में ही लड़ा गया था। लेकिन पार्टी को हार का मुंह देखना पड़ा था।  लेकिन वोट का प्रतिशत में कमी नहीं आई थी। 

पहली अग्नि परीक्षा फ्लोर टेस्ट और उपचुनाव होगा

मुख्यमंत्री का पद संभालने के बाद सबसे पहले शिवराज सिंह चौहान को विधानसभा में बहुमत परीक्षण से गुजरना पड़ेगा। मध्यप्रदेश विधानसभा में 230 सीटे है। दो विधायकों के निधन के चलते दो सीटे खाली हो गई है।  वहीं सिंधिया के समर्थक 22 विधायक और मंत्री के इस्तीफे के बाद अब 24 सीटें खाली हो गई है। इन सभी 24 सीटों पर छह माह के भीतर उप चुनाव होंगे। भाजपा को ज्यादा सीटें हासिल करना बड़ी चुनौती होगी। 

क्या है सीटों का गणित 

वर्तमान में भाजपा के पास 106 विधायक है। अगर 4 निर्दलीय विधायक भी भाजपा को समर्थन देते हैं तो भाजपा का आंकड़ा 110 हो जाएगा। इस स्थिति में 24 सीटों पर उपचुनाव होने से भाजपा को बहुमत के लिए 7 और सीटों की जरुरत होगी। अगर निर्दलीय विधायक भाजपा का साथ नहीं देते है तो उपचुनाव में पार्टी को कम से कम 9 सीटों पर जीत दर्ज करनी होगी। 

कमलनाथ सरकार उस समय संकट में आ गई थी। जब ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस ने पार्टी छोड़ दी और उनके साथ ही कांग्रेस के 22 विधायक भी पार्टी छोड़कर चल दिए।फ्लोर टेस्ट को लेकर कई कोशिशें हुईं,मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी करते हुए फ्लोर टेस्ट करने की बात कही। इसके ठीक बाद कमलनाथ ने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया और भाजपा ने सरकार बनाने का दावा पेश किया। 
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