घात लगाए बैठे हैं गिद्ध...इसको समझिए और जिम्मेदार बनिए।


रविन्द कुमार

मुस्लिम भाइयों, कृपया झांसे में न आयें। दिमाग का इस्तेमाल करें। यह जो आंशिक रूप से बाजार खोला गया है, उसकी राजनीति को समझें। यह आपकी मौज मस्ती के लिए नहीं, दुकानदार व्यापारियों की कमाई के लिए खोला गया है। उन व्यापारियों की कमाई के लिए, जो इस रमजान के महीने में मुसलमानों की जेब से साल भर के लिए पैसा पीट लेते हैं। दरअसल उनकी कमाई करवानी थी। उन्हें अक्षय तृतीया पर भी कमवाना था। उन्हें खुश करके उनके जख्मों पर मरहम लगाना था।...आप इस ट्रैप को समझिए। सावधान रहिए। 

अपनी तरफ से लॉकडाऊन का पूरी तरह से पालन कीजिए। बाहर निकलते समय मास्क और ग्लव्स पहनिए। फिजिकल डिस्टेंसिग का पालन कीजिए। अगर सीजनल जुकाम या बुखार हो, तो घर से बाहर मत निकलिए। नमाज़ घर पर ही पढ़िए। इफ्तार पार्टी का आयोजन मत कीजिए।

...यह यूं ही नहीं है कि सोशल मीडिया पर आपकी असली-फर्जी भीड़भाड़ वाली तस्वीरें खूब दिखाई जा रही हैं। इनको बाद में इस्तेमाल किया जाएगा। अगर खुदा ना खास्ते कोरोना का आउट ब्रेक हुआ तो इन तस्वीरों को दिखा दिखा कर उसका ठीकरा आपके सिर पर फोड़ा जाएगा।

...यह सांप्रदायिक मीडिया यह नहीं दिखायेगा कि ठीक हुए मुस्लिमों के प्लाज्मा से कइयों की जान बचाने की संभावना बन रही है। पर वह यह जरूर सनसनी बनाकर दिखायेगा कि देखा रमजान के महीने में सरकार ने थोड़ी छूट क्या दे दी, इन्होंने तो कोरोना ही फैला दिया।

...इधर आप लोंगो को लेकर जो ऊपर से नीचे तक बड़े बड़ों के सुर बदले हैं, उसके पीछे अंतर्राष्ट्रीय दबाव का बड़ा हाथ है। प्रायश्चित या माफीनामा जैसी कोई चीज़ नहीं।...इसको समझिए और समझदार बनिए। जिम्मेदार बनिए। 
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