मैंने जिस "रामराज्य" को किताबों में पढ़ा,वह यही तो है।

मैंने जिस "रामराज्य" को किताबों में पढ़ा,वह यही तो है।


अब्दुल रशीद

पूरी दुनिया कोरोना के महामारी से जूझ रहा है और हमारा देश भी इस महामारी से लड़ रहा है।इस मुश्किल दौर का मिलकर,डटकर मुक़ाबला करना है। हम हिंदुस्तानी सीमित संसाधन में असीमित सफलता अर्जित करने का हौंसला रखते हैं,इसी हौंसले के दम पर अनेकता में एकता के गुरुमंत्र के सहारे एक बार फिर जीत की मिसाल दुनिया मे कायम करना है,कोरोना को हराना है।

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के रामराज्य से लेकर नरेंद्र मोदी के सबका साथ सबका विकास तक हिंदुस्तानियों ने जिस हिंदुस्तान का सपना देखा है, वह बीते सोमवार को मध्यप्रदेश में कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाके इंदौर से निकली एक तस्वीर है। इस तस्वीर में एक वृद्ध हिंदू महिला दुर्गा की मौत हो जाने पर अर्थी सजाने से लेकर कांधों पर ले जाने तक की जिम्मेदारी इलाके के ही मुस्लिम नौजवानों ने निभाई।यह भी सच है के इंदौर का यह वह इलाका है,जिसके आस-पड़ोस ने डॉक्टरों पर थूका था, हमला किया था और पथराव कर इलाके से बाहर कर दिया था। असल में हम हिंदुस्तानियों के डीएनए की यही खूबसूरती है, जो दुनिया में और कहीं शायद ही देखने को मिले। इसी कौम ने रविवार को उज्जैन में कोरोना प्रभावित इलाकों में पहुंचे डॉक्टरों पर रास्तेभर फूल बरसाए थे, इंदौर के खजराना में डॉक्टरों के आने पर तालियां बजाई और इसी कौम ने चंद ज़ाहिलों की जहालत  पर अख़बारों में विज्ञापन देकर माफी मांगी। 

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्‌डा ने स्पष्ट और दो टूक कहा,पार्टी का कोई भी नेता कोरोना महामारी को साम्प्रदायिक रंग न दें,आज के इस माहौल में दुर्गा मां के लिए मुस्लिम बेटों ने जो काम किया वो उन नफरत फैलाने वालों के मुंह पर जोरदार तमाचा है जो हिन्दू मुस्लिमों को बांटकर अपनी राजनीति करते हैं।  

दुर्गा मां के अर्थी को इमरान का कंधा 

मध्यप्रदेश के इंदौर के तोड़ा जूना गणेश मंदिर के पास रहने वाली एक बुज़ुर्ग महिला, जिन्हें मोहल्ले वाले दुर्गा मां के नाम से पुकारते थे, कुछ दिनों से बीमार थीं। फिर वह चल बसीं। उनके दो लड़के हैं जो कहीं और रहते हैं। उन्हें बुलाया गया, जब वो आए तो उनके पास इतने पैसे भी नही थे कि अपनी मां का अंतिम संस्कार कर सकें।  आसपास के लोग कोरोना के डर से अर्थी को कंधा देने तक नहीं आए। तभी मुहल्ले के अकील भाई,असलम भाई, मुदस्सर भाई,राशिद इब्राहिम,इमरान सिराज जैसे मुस्लिम भाइयों ने अपनी दुर्गा मां का अंतिम संस्कार किया और आपसी भाईचारे की मिसाल पेश करते हुए सभी ने दुर्गा मां की अर्थी को कंधा दिया और जूनी इंदौर मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार उनके बेटों के साथ मिलकर कराया।
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