निजामुद्दीन मरकज़ : सबसे घटिया हरकत किसी भी ट्रैजेडी को सांप्रदायिक रंग देना !

Read the actual facts about the Nizamuddin Markaz covid cases.


कोरोना वायरस के चलते देशव्यापी लॉकडाउन के बीच मशहूर निजामुद्दीन मस्जिद में जमात के लिए मरकज का आयोजन किया।कोरोना संक्रमण फैलने के बीच अब निजामुद्दीन का तबलीगी जमात चर्चा का विषय बन गया है  और इसपर सियासत भी शुरू हो गई है। 

सोशल मीडिया पर नेताओं से लेकर कई यूजर्स ने इसे साजिश बताया है। कुछ हैशटैग्स के साथ सोशल मीडिया पर इसे सांप्रदायिक रंग देने की भी कोशिश हो रही है। जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने इसे इसे सांप्रदायिक रंग देने पर कड़ी आपत्ति जताई है। इसके साथ ही प्रशांत भूषण, जफर सरेशवाला आदि ने भी सवाल उठाए हैं। 

वकील और एक्टिविस्ट प्रशांत भूषण ने लिखा, 
“जब लॉकडाउन का ऐलान हुआ तब एक इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस चल रही थी। उन्होंने अधिकारियों को जानकारी दी और उनसे अनुरोध किया गया कि लोगों को बाहर जाने दिया जाए। उन्हें दोष देना सही नहीं है।”
मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी के पूर्व चांसलर जफर सरेशवाला ने ट्विटर पर लिखा कि सबसे घटिया हरकत किसी भी ट्रैजेडी को सांप्रदायिक रंग देना है। उन्होंने लिखा,
"लॉकडाउन के कारण कहीं जाने का कोई रास्ता ही नहीं था। उन्होंने हालात के बारे में पुलिस और अधिकारियों को बताया था। पुलिस वहां मौजूद हर शख्स के बारे में जानती थी।"
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