क्यों हारा ताइवान से करोना

क्यों हारा ताइवान से करोना


डॉ कुणाल सिंह

मात्र तीन करोड आबादी वाले ताइवान देश में अबतक करोना के 443 मामले और मौत केवल सात। ताइवान ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के ऐडवाइजरी का इंतजार नहीं किया न ही भारत और विश्व के विकसित देशों की तरह लापरवाही की,न ही उसने लाकडाउन किया बल्कि अपने सीमित संसाधनो और दृढइच्छा शक्ति एवं विवेक के बल पर करोना को हराने में सफल रहा। 

दरअसल, वुहान के एक अस्पताल के डाक्टर लीवेनलियांग ने दिसम्बर के अंत में करोना वाइरस के प्रभाव के बारे में पुरे विश्व को जानकारी दी थी। चीन ने जहां उन्हे अफवाह फैलाने का दोषी ठहराया ,ताइवान ने सबक ली जबकि पुरा विश्व चैन से सोता रहा।  चीन में पहला मामला आठ दिसम्बर को आया पर उसे निमोनियां समझा गया. 31 दिसम्बर को चीन में अचानक 27 मामले स्पस्ट रूप से करोना वाइरस के आये। 

31 दिसम्बर को ही ताइवान ने एडवाइजरी जारी कर दी और वुहान शहर से आये लोगों की जांच और सतत निगरानी शुरू कर दी। जहां भारत समेत तमाम विकसित देश करोना का हवाई सफर कराते रहे,ताइवान ने 26 जरवरी से चीने से आने वाले समस्त उडानों पर रोक लगादी। आवश्यक समानो की खरिदारी पर आड इन वन नियम लागू कर भींड नही लगने दी ,परंत् लाकडाउन नही किया। सभी सार्व जनिक कार्यक्रमों पर रोक लगाते हुए स्कूल कालेज बंद करदी और क्वानटेराइन को कडाई से लगु कर दिया गया। 

इस महामारी के भयानकता की खिल्ली उडाते हुए हमारे देश ने करोना का न शिर्फ हवाई सफर जारी रखा बल्कि "नमस्ते ट्रम्प" का भव्य आयोजन भी कराया.इस महामारी को रोकने के आवश्यक संसाधनों का निर्यात भी काफी समय तक होता रहा। आज सबकुछ भयावह है. उधर ताइवान ने आवश्यक संसाधनो के निर्यात पर देशहित में रोक लगाई और सेनिटाइजर के लिये आवश्यक अल्कोहल का प्रोडक्शन 75% बढा दिया। यह सबकुछ ताइवान में फरवरी तक पुरा कर लिया गया . इस तरह करोना को हराने में ताइवान कामयाब हुआ। 
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