डिप्रेशन(अवसाद) : क्या अकेलापन वाकई ज़िंदगी को खा जाता है !

डिप्रेशन(अवसाद) : क्या अकेलापन वाकई ज़िंदगी को खा जाता है !

उर्जांचल टाईगर "विशेष

यदि कोई आपसे आत्महत्या करने जैसी बातें करता है तो संभवतः वो डिप्रेशन(अवसाद)से ग्रसित है, और वह सिर्फ आपको अपनी बात ही नहीं बता रहा है बल्कि वो मदद के लिए चिल्ला रहा है, और आपको उसकी उस वक्त मदद ज़रूर करनी चाहिए। डिप्रेशन(अवसाद) की वज़ह से व्यक्ति आत्महत्या करने तक की सोच सकता है। डिप्रेशन(अवसाद) के दौरान व्यक्ति खुद को बिलकुल असहाय महसूस कर सकता है और उसे सभी समस्याओं  का हल अपनी जिंदगी खत्म करने में नज़र आने लगता है।

हम सभी के जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। कभी सफलता मिलने पर बहुत ख़ुशी मिलती है तो कभी असफल होने पे इंसान दुखी हो जाता है।मगर डिप्रेशन यानी अवसाद उससे कहीं ज़्यादा गहरा, लंबा और ज़्यादा दुखद होता है। इसकी वजह से लोगों की ज़िंदगी से रुचि ख़त्म होने लगती है और रोज़मर्रा के कामकाज से मन उचट जाता है। 

क्या होता है डिप्रेशन(अवसाद) ? 

पूरे दावे से तो नहीं बताया जा सका है कि अवसाद किस वजह से होता है, मगर माना जाता है कि इसमें कई चीज़ों की अहम भूमिका होती है। लेकिन ज़िंदग़ी के कई महत्वपूर्ण पड़ाव जैसे- किसी नज़दीक़ी की मौत, नौकरी चले जाना या शादी का टूट जाना, आम तौर पर अवसाद की वजह बनते हैं। 

इनके साथ ही अगर आपके मन में हर समय कुछ बुरा होने की आशंका रहती है तो इससे भी अवसाद में जाने का ख़तरा रहता है। इसके तहत लोग हमेशा सोचते रहते हैं 'मैं तो असफल हूँ'। 

कुछ मेडिकल कारणों से भी लोगों को अवसाद होता है, जिनमें एक है थायरॉयड की कम सक्रियता होना। कुछ दवाओं के साइड इफ़ेक्ट्स में भी अवसाद हो सकता है। इनमें ब्लड प्रेशर कम करने के लिए इस्तेमाल होने वाली कुछ दवाएँ शामिल हैं। 

डिप्रेशन(अवसाद) के लक्षण

1- मिज़ाज यानी मूड - सामान्य उदासी इसमें नहीं आती लेकिन किसी भी काम या चीज़ में मन न लगना, कोई रुचि न होना, किसी बात से कोई खुशी न होनी, यहां तक गम का भी अहसास न होना अवसाद का लक्ष्ण है। 
2-  हर समय नकारात्मक सोच होना 
3- नींद न आना या बहुत नींद आना। रात को दो-तीन बजे नींद का खुलना और अगर यह दो सप्ताह से अधिक चले तो अवसाद की निशानी है। 
4 - या तो आपको भूख नहीं लगती या आप बहुत ज्यादा खाते हैं।
5 - आपको लगता है कि ज़िन्दगी जीने लायक नहीं है और आपके मन में अत्महत्या करने का ख़्याल आने लगे।
इतना ही नहीं अवसाद बिना किसी एक ख़ास कारण के भी हो सकता है। ये धीरे-धीरे घर कर लेता है और बजाए मदद की कोशिश के आप उसी से संघर्ष करते रहते हैं। 


कौन हो सकता है डिप्रेशन(अवसाद)?

इसका दो टूक जवाब है - ये किसी को भी हो सकता है। 

डिप्रेशन(अवसाद) आनुवांशिक वजह भी हो सकती है। कुछ लोग जब चुनौतीपूर्ण समय से गुज़र रहे होते हैं तो उनके अवसाद में जाने की आशंका अधिक रहती है। जिन लोगों के परिवार में अवसाद का इतिहास रहा हो वहाँ लोगों के डिप्रेस्ड होने की आशंका भी ज़्यादा होती है। इसके अलावा गुणसूत्र 3 में होने वाले कुछ आनुवांशिकीय बदलावों से भी अवसाद हो सकता है। 


कैसे बचे डिप्रेशन(अवसाद)
  • नींद को नियमित रखना
  • अच्छा खाना और समय पर खाना
  • तनाव तो सभी को होता है लेकिन ऐसा विचार रखना कि इसे कैसे कम रखना है
  • महत्वाकांक्षा को उतना ही रखना जितना हासिल करना संभव हो
  • परिवार के साथ जुड़े रहना
  • अपने कार्य में व्यस्त और मस्त रहना

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